लौकिक साहित्य
प्राचीनकाल से भारत के अलग-अलग नाम रहे हैं मसलन जम्बूद्वीप, हिमवर्ष, अजनाभवर्ष, भारतखंड, , भारतवर्ष, आर्यावर्त, हिन्द, हिंदुस्तान और इंडिया।
मगर इन सबों में "भारत " सबसे ज्यादा लोकमान्य और प्रचलित में रहा है। नामकरण को लेकर सबसे ज्यादा धारणाएं एवं मतभेद भी भारत को लेकर ही है। भारत की वैविध्यपूर्ण संस्कृति की तरह ही अलग-अलग कालखंडों में इसके अलग-अलग नाम भी मिलते हैं। इन नामों में कभी भूगोल उभर कर आता है तो कभी जातीय चेतना और कभी संस्कार।
* भारतवर्ष का नामकरण के विषय में ऐसा कहा जाता है कि दुष्यन्त के पुत्र भरत के नाम पर इस देश का नाम भारत पड़ा है।
* कुछ विद्वानों का मत है कि ऋषभदेव के ज्येष्ठ पुत्र का नाम भरत था, और उन्हीं के नाम पर इस देश का नाम भारतवर्ष पड़ा है।
* ईरानियों ने इस देश को हिन्दुस्तान कहकर सम्बोधित किया है और यूनानियों ने इसे इण्डिया कहा है।
* प्राचीन साहित्य में भारतवर्ष को ‘भारतभूमि’ की संज्ञा दी गई है। इसे जम्बूद्वीप का एक भाग माना गया है।
* भारत को ‘चतु: संस्थान संस्थितम्’ कहा गया है।
* हिन्दू शब्द भी महान् सिन्धु नदी से निकला है। सिन्धु प्रदेश प्राचीनतम सभ्यता का विकास स्थल रह चुका है।
इस महायुद्ध को महाभारत से भी ढाई हजार वर्ष पूर्व हुआ बताया जाता है। साधारण सी बात है कि वह युद्ध जिसका नाम ही महा'भारत' है कब हुआ होगा? इतिहासकारों के मुताबिक, ईसा से करीब ढाई हजार साल पहले कौरवों-पांडवों के बीच महासमर हुआ था।
एक गृहकलह जो महासमर में बदल गई यह तो ठीक है, पर इस देश का नाम भारत है और दो कुटुम्बों की कलह की निर्णायक लड़ाई में देश का नाम क्यों आया। इसकी वजह यह कि इस युद्ध में भारत की भौगोलिक सीमा में आने वाले लगभग सभी साम्राज्यों ने हिस्सा लिया था, इसलिए इसे महाभारत कहते हैं।
दाशराज्ञ युद्ध इससे भी ढाई हजार साल पहले हुआ बताया जाता है। यानी आज से साढ़े सात हजार साल पहले। इसमें तृत्सु जाति के लोगों ने दस राज्यों के संघ पर अभूतपूर्व विजय प्राप्त की। तृत्सु जनों को भरतों का संघ कहा जाता था। इस युद्ध से पहले यह क्षेत्र अनेक नामों से प्रसिद्ध था। इस विजय के बाद तत्कालीन आर्यावर्त में भरत जनों का वर्चस्व बढ़ा और तत्कालीन जनपदों के महासंघ का नाम भारत हुआ अर्थात भरतों का।
जब अंग्रेज भारत में आए उस समय हमारे देश को हिन्दुस्तान कहा जाता था। हालांकि ये शब्द बोलने में उन्हें परेशानी होती थी। जब अंग्रेजों को पता चला कि भारत की सभ्यता सिंधु घाटी है जिसे इंडस वैली भी कहा जाता है, इस शब्द को लैटिन भाषा में इंडिया कहा जाता है तो उन्होंने भारत को इंडिया कहना शुरू कर दिया । अंग्रेजों के शासनकाल में इंडिया नाम काफी प्रसिद्ध हुआ और हमारा देश दुनिया में इस नाम से जाना जाने लगा ।
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