लौकिक साहित्य
स्मारक तथा खण्डहर पुरातात्विक साक्ष्य के महत्त्वपूर्ण पक्ष हैं। इनसे वास्तुकला और शिल्पशार का ज्ञान तो होता ही है,साथ ही सामान्य-जन-जीवन और लोगों के धार्मिक विश्वास इत्यादि के संबंध में भी महत्वपूर्ण सूचनायें मिलती हैं। मोहनजोदड़ो और हड़प्पा के उत्खननों से प्राप्त खण्डहर सैंध्यावजनों के नगर-निर्माण कला, गृह निर्माण कला तथा तत्सम्बन्धी अन्य पक्षों पर महत्वपूर्ण प्रकाश डालते हैं। भरहुत मे प्राप्त स्तू्पों की वेदिकाओं और तोरण द्वारों पर जो अंकन कार्य हुए है उनसे न्यालीन जन-जीवन का व्यापक विवरण प्राप्त होता है। अजन्ता की गफाओं में बने चित्र भी इस दृष्टिकोश से बड़े महत्व के हैं। ये स्रोत अपने युग के धार्मिक विचारधारा को भी परिलक्षित करते हैं। इसी प्रकार गुप्तकाल में वैष्णव, बौद्ध, जैन एवं शैव धर्म की मूर्तियाँ उस काल में लोगों में धार्मिक सहिष्णुता को इंगित करती हैं। मूर्तियों और चित्रों को भिन्य-भिन्य वेश-भूषा एवं हाव-भाव उस युग की धार्मिक एवं सामाजिक मान्यताओं की जानकारी प्रदान करते हैं |
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| अजन्ता की गफाओं में बने चित्र |
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