लौकिक साहित्य

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लौकिक साहित्य इस श्रेणी के अन्तर्गत आने वाले ग्रन्थ विविध अन्य विषयों को ध्यान में रखकर लिखे गये हैं। किंतु इनकी अन्तर्सामग्री ऐतिहासिक दृष्टि से पर्याप्त महत्त्व की है। कौटिल्य का अर्थसास्त्र इस श्रेणी केअन्तर्गत आने वाला सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ है। इससे मौर्यकालीन प्रशासन पर पर्याप्त प्रकाश पड़ता है। पाणिनि द्वारा लिखी गई अष्टाध्यायी तथा पतंजलि द्वारा इस पर लिखा गया भाष्य (महाभाष्य) व्याकरण ग्रन्थ हैं किन्तु प्रसंग वंश ये कई महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक सूचनायें प्रदान करते हैं। डा. वासुदेव शरण ने अष्टाध्यायी के आधार पर पाणिनिकालीन भारत नामक पुस्तक लिखी है जिसमें तत्कालीन समाज एवं संस्कृति की बड़ा व्यापक चित्रण मिलता है। पतंजलि के महाभाष्य से  यवनों द्वरा साकेत तथा मध्यमिका व आक्रमण की उल्लेख मिलता है। गार्गी संहिता मे भी यवन आक्रमण को चर्चा मिलती है। तमिल ग्रंथ पुरुनानूरु तथा मणिमेकलाई की गनना भी इसी श्रेणी के साहित्य में की जानी चाहिये | प्राचीन भारत का इतिहास लिखने में आधुनिक विद्वनो को इन  ग्रन्थों में मिलने वाली सूचनाओं से बड़ी सहायता मिली है। इमी प्रसंग में उन नाटक ग्रंथ...

इतिहास के साहित्यिक स्रोत

 साहित्यिक स्रोत




साहित्यिक स्रोत को मोटे तौर पर ऐतिहासिक और अर्ध-ऐतिहासिक वर्गों में बाटा जा सकता है । दूसरी कोटि के अन्तर्गत वे नाटक, काव्य ग्रन्थ आदि आते हैं जिनका मुख्य प्रयोजन ऐतिहासिक विवरण देना नहीं है किन्तु जिनमें महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक सूचनायें सुरक्षित होती हैं,और इतिहासकार इन्हें सावधानी से निकाल कर अतीत के सम्बन्ध में अपने विवरण में उपयोग में लेता है। इन ग्रन्थों के धार्मिक सम्बन्ध के आधार पर इन्हे मुख्य रूप से तीन वर्गों में रखा जा सकता है : (क) ब्राह्मण साहित्य, (ख) बोद्ध साहित्य, (ग) जैन साहित्य ।


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