लौकिक साहित्य
हमारे देश का नाम भारत कैसे पड़ा ?
राजा दुष्यंत चन्द्रवंशी राजा थे जिनके माता-पिता के नाम के सम्बन्ध में भिन्न-भिन्न मत है। भागवत और विष्णु पुराण रैभ्य (रैभ), हरिवंश में सुंत, महाभारत में ऐति, और वायु पुराण में मल्लि को इसका पिता बताया गया है। इसी प्रकार कहीं पर माँ का नाम स्तनतरी मिलता है और कहीं पर उपदानवी ।
इनकी कथा इस प्रकार है— एक दिन राजा दुष्यंत शिकार खेलते खेलते थककर कण्व मुनि के आश्रम के पास जा निकले । उस समय आश्रम में कण्व मुनि की लड़की शकुंतला थी । उसने राजा का उचित सत्कार किया ।राज उसके रूप देख उनपर मुग्घ हो गए ।
उधर राजा अपने राज्य कार्य में इतने वियस्त हो गए की अपनी रानी शकुंतला को भूल गए थे लेकिन जाते समय उन्हें शकुंतला को एक मुद्रिका दी थी एक समय वह मुद्रिका शकुंतला से नदी में नहाते समय खो गई थी जिसे एक मछली ने निगल लिया था एक दिन किसी मछुआरे ने उस मछली को पकड़कर जब काटा तो उसे राजा की मुद्रिका प्राप्त हुई वह उसे लेकर बेचने गया लेकिन उसे इसका मूल्य कोई नहीं दे सका , फिर किसी ने उसे राज्य दरवार जाने को कहा जहाँ उसे मुद्रिका का उचित मूल्य मिलता फिर वह राजदरबार में गया जब राजा दुष्यंत ने उस मुद्रिका को देखा तो उन्हें शकुंतला की वापस याद आ गई और उसी समय वो आश्रम के और शकुंतला को लाने निकल गए , जब वो जंगल आश्रम के निकट पहुचे तो उन्होंने देखा एक बच्चा शेर के बच्चो के साथ खेल रहा है , जिसे देख उन्हें बहुत आश्चर्य हुआ और जानना चाहते थे की इतने बलशाली बच्चा कौन हो सकता है , और वो इसी सोच के साथ वो बच्चे के पास गए और उसे अपने गोद में लेकर प्यार करने लगे।
इतने में शकुंतला भी आ गयी ,तभी राजा ने शकुंतला से माफ़ी मांगी और अपने साथ राज्य चलने को कहा और इस बच्चे के बारे में पूछने पर पता चला की ये उनका पुत्र है , तभी वो उसको अपने गले से लगा लिया और उनका नाम भरत रखा और सत्कार पूर्वक भी शकुंतला और अपने पुत्र भरत को लेकर आ गए आगे चलकर वही भरत चक्रवर्ती के नाम से हस्तिनापुर के राजा बने । भरत एक चक्रवर्ती सम्राट यानी चारों दिशाओं की भूमि का अधिग्रहण कर विशाल साम्राज्य का निर्माण कर अश्वमेध यज्ञ किया, जिसके चलते उनके राज्य को भारतवर्ष नाम मिला। आज हमारे देश का नाम भारत उन्हीं के नाम की ऊपर रखा गया है।
Comments
Post a Comment